श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.58

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स तु सत्यव्रतो राजा ज्ञानविज्ञानसंयुतः१।

विष्णोः प्रसादात् कल्पेऽस्मिन्‍नासीद् वैवस्वतो मनुः॥ ५८

sa tu satyavrato rājā jñānavijñānasaṃyutaḥ|

viṣṇoḥ prasādāt kalpe'sminnāsīd vaivasvato manuḥ|| 58

अर्थ

भगवान्‌की कृपासे राजा सत्यव्रत ज्ञान और विज्ञानसे संयुक्त होकर इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए॥ ५८॥✎ 845

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—सम्मतः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 1021)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #845 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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