अपनी योगमायासे मत्स्यरूप धारण करनेवाले भगवान् विष्णु और राजर्षि सत्यव्रतका यह संवाद एवं श्रेष्ठ आख्यान सुनकर मनुष्य सब प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है॥ ५९॥✎ 845
सत्यव्रतस्य राजर्षेर्मायामत्स्यस्य शार्ङ्गिणः।
संवादं महदाख्यानं श्रुत्वा मुच्येत किल्बिषात्॥ ५९
अपनी योगमायासे मत्स्यरूप धारण करनेवाले भगवान् विष्णु और राजर्षि सत्यव्रतका यह संवाद एवं श्रेष्ठ आख्यान सुनकर मनुष्य सब प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1021) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/59/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)