॥ श्रीहरिः ॥
ये मां स्तुवन्त्यनेनाङ्ग प्रतिबुध्य निशात्यये।
तेषां प्राणात्यये चाहं ददामि विमलां मतिम्॥ २५
ye māṃ stuvantyanenāṅga pratibudhya niśātyaye|
teṣāṃ prāṇātyaye cāhaṃ dadāmi vimalāṃ matim|| 25
अर्थ
प्यारे गजेन्द्र! जो लोग ब्राह्ममुहूर्तमें जगकर तुम्हारी की हुई स्तुतिसे मेरा स्तवन करेंगे, मृत्युके समय उन्हें मैं निर्मल बुद्धिका दान करूँगा॥ २५॥
ये मां स्तुवन्त्यनेनाङ्ग प्रतिबुध्य निशात्यये।
तेषां प्राणात्यये चाहं ददामि विमलां मतिम्॥ २५
प्यारे गजेन्द्र! जो लोग ब्राह्ममुहूर्तमें जगकर तुम्हारी की हुई स्तुतिसे मेरा स्तवन करेंगे, मृत्युके समय उन्हें मैं निर्मल बुद्धिका दान करूँगा॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 922) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/4/25/