श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.26

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्यादिश्य हृषीकेशः प्रध्माय जलजोत्तमम्।

हर्षयन्विबुधानीकमारुरोह खगाधिपम्॥ २६

ityādiśya hṛṣīkeśaḥ pradhmāya jalajottamam|

harṣayanvibudhānīkamāruroha khagādhipam|| 26

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा कहकर देवताओंको आनन्दित करते हुए अपना श्रेष्ठ शंख बजाया और गरुड़पर सवार हो गये॥ २६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे
गजेन्द्रमोक्षणं १ नाम चतुर्थोऽध्यायः॥ ४॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—मन्वन्तरानुवर्णने गजेन्द्रमोक्षोपाख्याने चतु०।

    (मुद्रित पृष्ठ 922)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें