गजेन्द्र भी भगवान्का स्पर्श प्राप्त होते ही अज्ञानके बन्धनसे मुक्त हो गया। उसे भगवान्का ही रूप प्राप्त हो गया। वह पीताम्बरधारी एवं चतुर्भुज बन गया॥ ६॥
गजेन्द्रो भगवत्स्पर्शाद् विमुक्तोऽज्ञानबन्धनात्।
प्राप्तो भगवतो रूपं पीतवासाश्चतुर्भुजः॥ ६
गजेन्द्र भी भगवान्का स्पर्श प्राप्त होते ही अज्ञानके बन्धनसे मुक्त हो गया। उसे भगवान्का ही रूप प्राप्त हो गया। वह पीताम्बरधारी एवं चतुर्भुज बन गया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 920) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/4/6/