श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

स विलोक्येन्द्रवाय्वादीन् निःसत्त्वान्विगतप्रभान्।

लोकानमङ्गलप्रायानसुरानयथा विभुः॥ १९

sa vilokyendravāyvādīn niḥsattvānvigataprabhān|

lokānamaṅgalaprāyānasurānayathā vibhuḥ|| 19

अर्थ

ब्रह्माजीने स्वयं देखा कि इन्द्र, वायु आदि देवता श्रीहीन एवं शक्तिहीन हो गये हैं। लोगोंकी परिस्थिति बड़ी विकट, संकटग्रस्त हो गयी है और असुर इसके विपरीत फल-फूल रहे हैं॥ १९॥

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