समर्थ ब्रह्माजीने अपना मन एकाग्र करके परम पुरुष भगवान्का स्मरण किया; फिर थोड़ी देर रुककर प्रफुल्लित मुखसे देवताओंको सम्बोधित करते हुए कहा॥ २०॥
समाहितेन मनसा संस्मरन्पुरुषं परम्।
उवाचोत्फुल्लवदनो देवान्स भगवान्परः॥ २०
समर्थ ब्रह्माजीने अपना मन एकाग्र करके परम पुरुष भगवान्का स्मरण किया; फिर थोड़ी देर रुककर प्रफुल्लित मुखसे देवताओंको सम्बोधित करते हुए कहा॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 924) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/5/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#964 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् पर:॥ → भगवान्परः॥