भगवान्को समर्पित किया हुआ छोटे-से-छोटा कर्माभास भी कभी विफल नहीं होता। क्योंकि भगवान् जीवके परम हितैषी, परम प्रियतम और आत्मा ही हैं॥ ४८॥✎ 687688
नावमः कर्मकल्पोऽपि विफलायेश्वरार्पितः।
कल्पते पुरुषस्यैष स ह्यात्मा दयितो हितः॥ ४८
भगवान्को समर्पित किया हुआ छोटे-से-छोटा कर्माभास भी कभी विफल नहीं होता। क्योंकि भगवान् जीवके परम हितैषी, परम प्रियतम और आत्मा ही हैं॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 929) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/5/48/