जैसे वृक्षकी जड़को पानीसे सींचना उसकी बड़ी-बड़ी शाखाओं और छोटी-छोटी डालियोंको भी सींचना है, वैसे ही सर्वात्मा भगवान्की आराधना सम्पूर्ण प्राणियोंकी और अपनी भी आराधना है॥ ४९॥✎ 687688
यथा हि स्कन्धशाखानां तरोर्मूलावसेचनम्।
एवमाराधनं विष्णोः सर्वेषामात्मनश्च हि॥ ४९
जैसे वृक्षकी जड़को पानीसे सींचना उसकी बड़ी-बड़ी शाखाओं और छोटी-छोटी डालियोंको भी सींचना है, वैसे ही सर्वात्मा भगवान्की आराधना सम्पूर्ण प्राणियोंकी और अपनी भी आराधना है॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 929) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/5/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)