॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.6.23
सहायेन मया देवा निर्मन्थध्वमतन्द्रिताः।
क्लेशभाजो भविष्यन्ति दैत्या यूयं फलग्रहाः॥ २३
sahāyena mayā devā nirmanthadhvamatandritāḥ|
kleśabhājo bhaviṣyanti daityā yūyaṃ phalagrahāḥ|| 23
अर्थ
पहले क्षीरसागरमें सब प्रकारके घास, तिनके, लताएँ और ओषधियाँ डाल दो। फिर तुमलोग मन्दराचलकी मथानी और वासुकि नागकी नेती बनाकर मेरी सहायतासे समुद्रका मन्थन करो। अब आलस्य और प्रमादका समय नहीं है। देवताओ! विश्वास रखो—दैत्योंको तो मिलेगा केवल श्रम और क्लेश, परन्तु फल मिलेगा तुम्हीं लोगोंको॥ २२-२३॥✎ 692