श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यूयं तदनुमोदध्वं यदिच्छन्त्यसुराः सुराः।

न संरम्भेण सिध्यन्ति सर्वेऽर्थाः सान्त्वया यथा॥ २४

yūyaṃ tadanumodadhvaṃ yadicchantyasurāḥ surāḥ|

na saṃrambheṇa sidhyanti sarve'rthāḥ sāntvayā yathā|| 24

अर्थ

देवताओ! असुरलोग तुमसे जो-जो चाहें, सब स्वीकार कर लो। शान्तिसे सब काम बन जाते हैं, क्रोध करनेसे कुछ नहीं होता॥ २४॥✎ 692

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #692 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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