न संरम्भेण सिध्यन्ति सर्वेऽर्थाः सान्त्वया यथा॥ २४
yūyaṃ tadanumodadhvaṃ yadicchantyasurāḥ surāḥ|
na saṃrambheṇa sidhyanti sarve'rthāḥ sāntvayā yathā|| 24
अर्थ
देवताओ! असुरलोग तुमसे जो-जो चाहें, सब स्वीकार कर लो। शान्तिसे सब काम बन जाते हैं, क्रोध करनेसे कुछ नहीं होता॥ २४॥✎ 692
यूयं तदनुमोदध्वं यदिच्छन्त्यसुराः सुराः।
न संरम्भेण सिध्यन्ति सर्वेऽर्थाः सान्त्वया यथा॥ २४
देवताओ! असुरलोग तुमसे जो-जो चाहें, सब स्वीकार कर लो। शान्तिसे सब काम बन जाते हैं, क्रोध करनेसे कुछ नहीं होता॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 932) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/6/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#692 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने