श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! देवताओंको यह आदेश देकर पुरुषोत्तम भगवान् उनके बीचमें ही अन्तर्धान हो गये। वे सर्वशक्तिमान् एवं परम स्वतन्त्र जो ठहरे। उनकी लीलाका रहस्य कौन समझे॥ २६॥
इति देवान्समादिश्य भगवान्पुरुषोत्तमः।
तेषामन्तर्दधे राजन्स्वच्छन्दगतिरीश्वरः॥ २६
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! देवताओंको यह आदेश देकर पुरुषोत्तम भगवान् उनके बीचमें ही अन्तर्धान हो गये। वे सर्वशक्तिमान् एवं परम स्वतन्त्र जो ठहरे। उनकी लीलाका रहस्य कौन समझे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 932) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/26/