श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.30

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

महेन्द्रः श्लक्ष्णया वाचा सान्त्वयित्वा महामतिः।

अभ्यभाषत तत् सर्वं शिक्षितं पुरुषोत्तमात्॥ ३०

mahendraḥ ślakṣṇayā vācā sāntvayitvā mahāmatiḥ|

abhyabhāṣata tat sarvaṃ śikṣitaṃ puruṣottamāt|| 30

अर्थ

बुद्धिमान् इन्द्रने बड़ी मधुर वाणीसे समझाते हुए राजा बलिसे वे सब बातें कहीं, जिनकी शिक्षा स्वयं भगवान्‌ने उन्हें दी थी॥ ३०॥✎ 694

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #694 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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