वह सोनेका पर्वत मन्दराचल बड़ा भारी था। गिरते समय उसने बहुत-से देवता और दानवोंको चकनाचूर कर डाला॥ ३५॥
निपतन्स गिरिस्तत्र बहूनमरदानवान्।
चूर्णयामास महता भारेण कनकाचलः॥ ३५
वह सोनेका पर्वत मन्दराचल बड़ा भारी था। गिरते समय उसने बहुत-से देवता और दानवोंको चकनाचूर कर डाला॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 933) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/6/35/