उन देवता और असुरोंके हाथ, कमर और कंधे टूट ही गये थे, मन भी टूट गया। उनका उत्साह भंग हुआ देख गरुड़पर चढ़े हुए भगवान् सहसा वहीं प्रकट हो गये॥ ३६॥
तांस्तथा भग्नमनसो भग्नबाहूरुकन्धरान्।
विज्ञाय भगवांस्तत्र बभूव गरुडध्वजः॥ ३६
उन देवता और असुरोंके हाथ, कमर और कंधे टूट ही गये थे, मन भी टूट गया। उनका उत्साह भंग हुआ देख गरुड़पर चढ़े हुए भगवान् सहसा वहीं प्रकट हो गये॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 934) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/6/36/