श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.28

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कुक्षिः समुद्रा गिरयोऽस्थिसङ्घा

रोमाणि सर्वौषधिवीरुधस्ते।

छन्दांसि साक्षात् तव सप्त धातव-

स्त्रयीमयात्मन् हृदयं सर्वधर्मः॥ २८

kukṣiḥ samudrā girayo'sthisaṅghā

romāṇi sarvauṣadhivīrudhaste|

chandāṃsi sākṣāt tava sapta dhātava-

strayīmayātman hṛdayaṃ sarvadharmaḥ|| 28

अर्थ

वेदस्वरूप भगवन्! समुद्र आपकी कोख हैं। पर्वत हड्डियाँ हैं। सब प्रकारकी ओषधियाँ और घास आपके रोम हैं। गायत्री आदि छन्द आपकी सातों धातुएँ हैं और सभी प्रकारके धर्म आपके हृदय हैं॥ २८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें