श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.39

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

प्राणैः स्वैः प्राणिनः पान्ति साधवः क्षणभङ्गुरैः।

बद्धवैरेषु भूतेषु मोहितेष्वात्ममायया॥ ३९

prāṇaiḥ svaiḥ prāṇinaḥ pānti sādhavaḥ kṣaṇabhaṅguraiḥ|

baddhavaireṣu bhūteṣu mohiteṣvātmamāyayā|| 39

अर्थ

सज्जन पुरुष अपने क्षणभंगुर प्राणोंकी बलि देकर भी दूसरे प्राणियोंके प्राणकी रक्षा करते हैं। कल्याणि! अपने ही मोहकी मायामें फँसकर संसारके प्राणी मोहित हो रहे हैं और एक-दूसरेसे वैरकी गाँठ बाँधे बैठे हैं॥ ३९॥

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