॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.7.40
पुंसः कृपयतो भद्रे सर्वात्मा प्रीयते हरिः।
प्रीते हरौ भगवति प्री४येऽहं सचराचरः।
तस्मादिदं गरं भुञ्जे प्रजानां स्वस्तिरस्तु मे॥ ४०
puṃsaḥ kṛpayato bhadre sarvātmā prīyate hariḥ|
prīte harau bhagavati prīye'haṃ sacarācaraḥ|
tasmādidaṃ garaṃ bhuñje prajānāṃ svastirastu me|| 40
अर्थ
उनके ऊपर जो कृपा करता है, उसपर सर्वात्मा भगवान् श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और जब भगवान् प्रसन्न हो जाते हैं, तब चराचर जगत्के साथ मैं भी प्रसन्न हो जाता हूँ। इसलिये अभी-अभी मैं इस विषको भक्षण करता हूँ, जिससे मेरी प्रजाका कल्याण हो॥ ४०॥
टिप्पणियाँ
- ४
प्रा० पा०—संप्रीयेत चराचरम्।