श्रीशुकदेवजी कहते हैं—विश्वके जीवनदाता भगवान् शंकर इस प्रकार सती देवीसे प्रस्ताव करके उस विषको खानेके लिये तैयार हो गये। देवी तो उनका प्रभाव जानती ही थीं, उन्होंने हृदयसे इस बातका अनुमोदन किया॥ ४१॥
एवमामन्त्र्य भगवान्भवानीं विश्वभावनः।
तद् विषं जग्धुमारेभे प्रभावज्ञान्वमोदत॥ ४१
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—विश्वके जीवनदाता भगवान् शंकर इस प्रकार सती देवीसे प्रस्ताव करके उस विषको खानेके लिये तैयार हो गये। देवी तो उनका प्रभाव जानती ही थीं, उन्होंने हृदयसे इस बातका अनुमोदन किया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.7.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 941) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/7/41/