मोहिनीमें उनका अत्यन्त प्रेम हो गया था। वे डर रहे थे कि उससे हमारा प्रेमसम्बन्ध टूट न जाय। मोहिनीने भी पहले उन लोगोंका बड़ा सम्मान किया था, इससे वे और भी बँध गये थे। यही कारण है कि उन्होंने मोहिनीको कोई अप्रिय बात नहीं कही॥ २३॥
तस्यां कृतातिप्रणयाः प्रणयापायकातराः।
बहुमानेन चाबद्धा नोचुः किञ्चन विप्रियम्॥ २३
मोहिनीमें उनका अत्यन्त प्रेम हो गया था। वे डर रहे थे कि उससे हमारा प्रेमसम्बन्ध टूट न जाय। मोहिनीने भी पहले उन लोगोंका बड़ा सम्मान किया था, इससे वे और भी बँध गये थे। यही कारण है कि उन्होंने मोहिनीको कोई अप्रिय बात नहीं कही॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 950) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/9/23/