श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.22

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

ते पालयन्तः समयमसुराः स्वकृतं नृप।

तूष्णीमासन्कृतस्नेहाः स्त्रीविवादजुगुप्सया॥ २२

te pālayantaḥ samayamasurāḥ svakṛtaṃ nṛpa|

tūṣṇīmāsankṛtasnehāḥ strīvivādajugupsayā|| 22

अर्थ

परीक्षित्! असुर अपनी की हुई प्रतिज्ञाका पालन कर रहे थे। उनका स्नेह भी हो गया था और वे स्त्रीसे झगड़नेमें अपनी निन्दा भी समझते थे। इसलिये वे चुपचाप बैठे रहे॥ २२॥

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