जब देवताओंने अमृत पी लिया, तब समस्त लोकोंको जीवनदान करनेवाले भगवान्ने बड़े-बड़े दैत्योंके सामने ही मोहिनीरूप त्यागकर अपना वास्तविक रूप धारण कर लिया॥ २७॥✎ 722
पीतप्रायेऽमृते देवैर्भगवाल्ँलोकभावनः।
पश्यतामसुरेन्द्राणां स्वं रूपं जगृहे हरिः॥ २७
जब देवताओंने अमृत पी लिया, तब समस्त लोकोंको जीवनदान करनेवाले भगवान्ने बड़े-बड़े दैत्योंके सामने ही मोहिनीरूप त्यागकर अपना वास्तविक रूप धारण कर लिया॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 950) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/9/27/