श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

परिक्षीणेषु कुरुषु द्रौणेर्ब्रह्मास्त्रतेजसा।

त्वं च कृष्णानुभावेन सजीवो मोचितोऽन्तकात्॥ ३४

parikṣīṇeṣu kuruṣu drauṇerbrahmāstratejasā|

tvaṃ ca kṛṣṇānubhāvena sajīvo mocito'ntakāt|| 34

अर्थ

परीक्षित्! उस समय कुरुवंशका नाश हो चुका था। अश्‍वत्थामाके ब्रह्मास्त्रसे तुम भी जल ही चुके थे, परन्तु भगवान् श्रीकृष्णने अपने प्रभावसे तुम्हें उस मृत्युसे जीता-जागता बचा लिया॥ ३४॥

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