श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अन्वजानंस्ततः सर्वे ग्रहं सोमस्य चाश्‍विनोः।

भिषजाविति यत् पूर्वं सोमाहुत्या बहिष्कृतौ॥ २६

anvajānaṃstataḥ sarve grahaṃ somasya cāśvinoḥ|

bhiṣajāviti yat pūrvaṃ somāhutyā bahiṣkṛtau|| 26

अर्थ

तब सब देवताओंने अश्‍विनीकुमारोंको सोमका भाग देना स्वीकार कर लिया। उन लोगोंने वैद्य होनेके कारण पहले अश्‍विनीकुमारोंका सोमपानसे बहिष्कार कर रखा था॥ २६॥

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