श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.35

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

लब्धकामैरनुज्ञातः पारणायोपचक्रमे।

तस्य तर्ह्यतिथिः साक्षाद् दुर्वासा भगवानभूत्॥ ३५

labdhakāmairanujñātaḥ pāraṇāyopacakrame|

tasya tarhyatithiḥ sākṣād durvāsā bhagavānabhūt|| 35

अर्थ

जब ब्राह्मणोंको सब कुछ मिल चुका, तब राजाने उन लोगोंसे आज्ञा लेकर व्रतका पारण करनेकी तैयारी की। उसी समय शाप और वरदान देनेमें समर्थ स्वयं दुर्वासाजी भी उनके यहाँ अतिथिके रूपमें पधारे॥ ३५॥

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