श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अंशुमानुवाच

न पश्यति त्वां परमात्मनोऽजनो

न बुध्यतेऽद्यापि समाधियुक्तिभिः।

कुतोऽपरे तस्य मनःशरीरधी-

विसर्गसृष्टा२ वयमप्रकाशाः॥ २२

na paśyati tvāṃ paramātmano'jano

na budhyate'dyāpi samādhiyuktibhiḥ|

kuto'pare tasya manaḥśarīradhī-

visargasṛṣṭā vayamaprakāśāḥ|| 22

अर्थ

अंशुमान्‍ने कहा—भगवन्! आप अजन्मा ब्रह्माजीसे भी परे हैं। इसीलिये वे आपको प्रत्यक्ष नहीं देख पाते। देखनेकी बात तो अलग रही—वे समाधि करते-करते एवं युक्ति लड़ाते-लड़ाते हार गये, किन्तु आजतक आपको समझ भी नहीं पाये। हमलोग तो उनके मन, शरीर और बुद्धिसे होनेवाली सृष्टिके द्वारा बने हुए अज्ञानी जीव हैं। तब भला, हम आपको कैसे समझ सकते हैं॥ २२॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    सृष्टावयवप्रकाशकाः।

    (मुद्रित पृष्ठ 43)

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