॥ श्रीहरिः ॥
क्व सुधा क्व कथा लोके क्व काचः क्व मणिर्महान्।
ब्रह्मरातो विचार्यैवं तदा देवाञ्जहास ह॥ १६
kva sudhā kva kathā loke kva kācaḥ kva maṇirmahān|
brahmarāto vicāryaivaṃ tadā devāñjahāsa ha|| 16
अर्थ
इस संसारमें कहाँ काँच और कहाँ महामूल्य मणि तथा कहाँ सुधा और कहाँ कथा? श्रीशुकदेवजीने (यह सोचकर) उस समय देवताओंकी हँसी उड़ा दी॥ १६॥
क्व सुधा क्व कथा लोके क्व काचः क्व मणिर्महान्।
ब्रह्मरातो विचार्यैवं तदा देवाञ्जहास ह॥ १६
इस संसारमें कहाँ काँच और कहाँ महामूल्य मणि तथा कहाँ सुधा और कहाँ कथा? श्रीशुकदेवजीने (यह सोचकर) उस समय देवताओंकी हँसी उड़ा दी॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 34) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/1/16/