किन्तु सामने पड़े हुए ये दोनों मेरे पुत्र थके-माँदे दुःखी हो रहे हैं। अब मैं यह स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूँ॥ ५१॥
इमौ तु शयितावत्र सुतौ मे क्लिश्यतः श्रमात्।
इदं स्थानं परित्यज्य विदेशं गम्यते मया॥ ५१
किन्तु सामने पड़े हुए ये दोनों मेरे पुत्र थके-माँदे दुःखी हो रहे हैं। अब मैं यह स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूँ॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 37) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/51/