sāhaṃ tu taruṇī kasmātsutau vṛddhāvimau kutaḥ|| 52
अर्थ
ये दोनों बूढ़े हो गये हैं—इसी दुःखसे मैं दुःखी हूँ। मैं तरुणी क्यों और ये दोनों मेरे पुत्र बूढ़े क्यों?॥ ५२॥
जरठत्वं समायातौ तेन दुःखेन दुःखिता।
साहं तु तरुणी कस्मात्सुतौ वृद्धाविमौ कुतः॥ ५२
ये दोनों बूढ़े हो गये हैं—इसी दुःखसे मैं दुःखी हूँ। मैं तरुणी क्यों और ये दोनों मेरे पुत्र बूढ़े क्यों?॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 37) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/52/