श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वैपरीत्यमिदं दृष्ट्वा गोकर्णो धैर्यसंयुतः।

अयं दुर्गतिकः कोऽपि निश्चित्याथ तमब्रवीत्॥ २३

vaiparītyamidaṃ dṛṣṭvā gokarṇo dhairyasaṃyutaḥ|

ayaṃ durgatikaḥ ko'pi niścityātha tamabravīt|| 23

अर्थ

ये विपरीत अवस्थाएँ देखकर गोकर्णने निश्‍चय किया कि यह कोई दुर्गतिको प्राप्त हुआ जीव है। तब उन्होंने उससे धैर्यपूर्वक पूछा॥ २३॥

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