पहले तो यत्नपूर्वक ज्योतिषीको बुलाकर मुहूर्त पूछना चाहिये तथा विवाहके लिये जिस प्रकार धनका प्रबन्ध किया जाता है उस प्रकार ही धनकी व्यवस्था इसके लिये करनी चाहिये॥ २॥
दैवज्ञं तु समाहूय मुहूर्तं पृच्छ्य यत्नतः।
विवाहे यादृशं वित्तं तादृशं परिकल्पयेत्॥ २
पहले तो यत्नपूर्वक ज्योतिषीको बुलाकर मुहूर्त पूछना चाहिये तथा विवाहके लिये जिस प्रकार धनका प्रबन्ध किया जाता है उस प्रकार ही धनकी व्यवस्था इसके लिये करनी चाहिये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 70) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/2/