सूतजी कहते हैं—शौनकजी! यों कहकर महामुनि सनकादिने एक सप्ताहतक विधिपूर्वक इस सर्वपापनाशिनी, परम पवित्र तथा भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली भागवतकथाका प्रवचन किया। सब प्राणियोंने नियमपूर्वक इसे श्रवण किया। इसके पश्चात् उन्होंने विधिपूर्वक भगवान् पुरुषोत्तमकी स्तुति की॥ ७०-७१॥
यह अर्थ श्लोक 70–71 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
इत्युक्त्वा ते महात्मानः प्रोचुर्भागवतीं कथाम्।
सर्वपापहरां पुण्यां भुक्तिमुक्तिप्रदायिनीम्॥ ७०
सूतजी कहते हैं—शौनकजी! यों कहकर महामुनि सनकादिने एक सप्ताहतक विधिपूर्वक इस सर्वपापनाशिनी, परम पवित्र तथा भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली भागवतकथाका प्रवचन किया। सब प्राणियोंने नियमपूर्वक इसे श्रवण किया। इसके पश्चात् उन्होंने विधिपूर्वक भगवान् पुरुषोत्तमकी स्तुति की॥ ७०-७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 76) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/70/