श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.72

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तदन्ते ज्ञानवैराग्यभक्तीनां पुष्टता परा।

तारुण्यं परमं चाभूत्सर्वभूतमनोहरम्॥ ७२

tadante jñānavairāgyabhaktīnāṃ puṣṭatā parā|

tāruṇyaṃ paramaṃ cābhūtsarvabhūtamanoharam|| 72

अर्थ

कथाके अन्तमें ज्ञान, वैराग्य और भक्तिको बड़ी पुष्टि मिली और वे तीनों एकदम तरुण होकर सब जीवोंका चित्त अपनी ओर आकर्षित करने लगे॥ ७२॥

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