॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.83
स्वर्गे सत्ये च कैलासे वैकुण्ठे नास्त्ययं रसः।
अतः पिबन्तु सद्भाग्या मा मा मुञ्चत कर्हिचित्॥ ८३
svarge satye ca kailāse vaikuṇṭhe nāstyayaṃ rasaḥ|
ataḥ pibantu sadbhāgyā mā mā muñcata karhicit|| 83
अर्थ
यह रस स्वर्गलोक, सत्यलोक, कैलास और वैकुण्ठमें भी नहीं है। इसलिये भाग्यवान् श्रोताओ! तुम इसका खूब पान करो; इसे कभी मत छोड़ो, मत छोड़ो॥ ८३॥✎ 1273