श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.84

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सूत उवाच

एवं ब्रुवाणे सति बादरायणौ मध्ये सभायां हरिराविरासीत्।

प्रह्रादबल्युद्धवफाल्गुनादिभिर्वृतः सुरर्षिस्तमपूजयच्च तान्॥ ८४✎ 983 984

evaṃ bruvāṇe sati bādarāyaṇau madhye sabhāyāṃ harirāvirāsīt|

prahrādabalyuddhavaphālgunādibhirvṛtaḥ surarṣistamapūjayacca tān|| 84

अर्थ

सूतजी कहते हैं—श्रीशुकदेवजी इस प्रकार कह ही रहे थे कि उस सभाके बीचोबीच प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदोंके सहित साक्षात् श्रीहरि प्रकट हो गये। तब देवर्षि नारदने भगवान् और उनके भक्तोंकी यथोचित पूजा की॥ ८४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #983 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रहृदबल्युद्धवफाल्गुनादिभि- र्वृत: → प्रहृदबल्युद्धवफाल्गुनादिभिर्वृतः
  • #984 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): प्रहृदबल्युद्धवफाल्गुनादिभिर्वृत: → प्रह्रादबल्युद्धवफाल्गुनादिभिर्वृतः

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