॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.1.39
नद्यद्रिद्रोणिकुण्डादिकुञ्जान् संसेवतस्तव।
राज्ये प्रजाः सुसम्पन्नास्त्वं च प्रीतो भविष्यसि॥ ३९
nadyadridroṇikuṇḍādikuñjān saṃsevatastava|
rājye prajāḥ susampannāstvaṃ ca prīto bhaviṣyasi|| 39
अर्थ
उन-उन स्थानोंमें रहकर भगवान्की लीलाके स्थल नदी, पर्वत, घाटी, सरोवर और कुण्ड तथा कुंज-वन आदिका सेवन करते रहना चाहिये। ऐसा करनेसे तुम्हारे राज्यमें प्रजा बहुत ही सम्पन्न होगी और तुम भी अत्यन्त प्रसन्न रहोगे॥ ३९॥