बृहस्पतिजी कहते हैं—जब ब्रह्माजीने ऐसी प्रार्थना की, तब पूर्वकालमें भगवान्ने उन्हें श्रीमद्भागवतका उपदेश देकर कहा—‘ब्रह्मन्! तुम अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये सदा ही इसका सेवन करते रहो’॥ २५॥
यदा तु भगवांस्तस्मै श्रीमद्भागवतं पुरा।
उपदिश्याब्रवीद् ब्रह्मन् सेवस्वैनत् स्वसिद्धये॥ २५
बृहस्पतिजी कहते हैं—जब ब्रह्माजीने ऐसी प्रार्थना की, तब पूर्वकालमें भगवान्ने उन्हें श्रीमद्भागवतका उपदेश देकर कहा—‘ब्रह्मन्! तुम अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये सदा ही इसका सेवन करते रहो’॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 996) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/25/