उद्धवजीने कहा—राजन्! तुम्हें तो किसी भी बातके लिये किसी प्रकार भी चिन्ता नहीं करनी चाहिये; क्योंकि इस भागवतशास्त्रके प्रधान अधिकारी तो तुम्हीं हो॥ ६०॥
राजंश्चिन्ता तु ते कापि नैव कार्या कथंचन।
तवैव भगवच्छास्त्रे यतो मुख्याधिकारिता॥ ६०
उद्धवजीने कहा—राजन्! तुम्हें तो किसी भी बातके लिये किसी प्रकार भी चिन्ता नहीं करनी चाहिये; क्योंकि इस भागवतशास्त्रके प्रधान अधिकारी तो तुम्हीं हो॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1000) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/60/