॥ श्रीहरिः ॥
सर्वसद्गुणमाहात्म्ये६ एष कृष्णमनुव्रतः।
रन्तिदेव इवोदारो ययातिरिव धार्मिकः॥ २४
sarvasadguṇamāhātmye eṣa kṛṣṇamanuvrataḥ|
rantideva ivodāro yayātiriva dhārmikaḥ|| 24
अर्थ
यह समस्त सद्गुणोंकी महिमा धारण करनेमें श्रीकृष्णका अनुयायी होगा, रन्तिदेवके समान उदार होगा और ययातिके समान धार्मिक होगा॥ २४॥✎ 86
सर्वसद्गुणमाहात्म्ये एष कृष्णमनुव्रतः।
रन्तिदेव इवोदारो ययातिरिव धार्मिकः॥ २४
यह समस्त सद्गुणोंकी महिमा धारण करनेमें श्रीकृष्णका अनुयायी होगा, रन्तिदेवके समान उदार होगा और ययातिके समान धार्मिक होगा॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 137) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/24/टिप्पणियाँ
- ६
प्रा० पा०—माहात्म्यमेष कृष्ण०।
(मुद्रित पृष्ठ 137)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #86 शब्दोंके बीचका स्थान: होगा॥१९॥ → होगा॥ १९॥