धैर्यमें बलिके समान और भगवान् श्रीकृष्णके प्रति दृढ़ निष्ठामें यह प्रह्लादके समान होगा। यह बहुतसे अश्वमेधयज्ञोंका करनेवाला और वृद्धोंका सेवक होगा॥ २५॥✎ 86
धृत्या बलिसमः कृष्णे प्रह्राद इव सद्ग्रहः।
आहर्तैषोऽश्वमेधानां वृद्धानां पर्युपासकः॥ २५
धैर्यमें बलिके समान और भगवान् श्रीकृष्णके प्रति दृढ़ निष्ठामें यह प्रह्लादके समान होगा। यह बहुतसे अश्वमेधयज्ञोंका करनेवाला और वृद्धोंका सेवक होगा॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 137) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/12/25/