ब्राह्मणकुमारके शापसे तक्षकके द्वारा अपनी मृत्यु सुनकर यह सबकी आसक्ति छोड़ देगा और भगवान्के चरणोंकी शरण लेगा॥ २७॥✎ 86
तक्षकादात्मनो मृत्युं द्विजपुत्रोपसर्जितात्।
प्रपत्स्यत उपश्रुत्य मुक्तसङ्गः पदं हरेः॥ २७
ब्राह्मणकुमारके शापसे तक्षकके द्वारा अपनी मृत्यु सुनकर यह सबकी आसक्ति छोड़ देगा और भगवान्के चरणोंकी शरण लेगा॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 138) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/12/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)