चौदहवें अवतारमें उन्होंने नरसिंहरूप धारण किया और अत्यन्त बलवान् दैत्यराज हिरण्यकशिपुकी छाती अपने नखोंसे अनायास इस प्रकार फाड़ डाली, जैसे चटाई बनानेवाला सींकको चीर डालता है॥ १८॥✎ 3031
चतुर्दशं नारसिंहं बिभ्रद्दैत्येन्द्रमूर्जितम्।
ददार करजैर्वक्षस्येरकां कटकृद्यथा॥ १८
चौदहवें अवतारमें उन्होंने नरसिंहरूप धारण किया और अत्यन्त बलवान् दैत्यराज हिरण्यकशिपुकी छाती अपने नखोंसे अनायास इस प्रकार फाड़ डाली, जैसे चटाई बनानेवाला सींकको चीर डालता है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 90) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/3/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)