श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

पञ्चदशं वामनकं कृत्वागादध्वरं बलेः।

पदत्रयं याचमानः प्रत्यादित्सुस्त्रिविष्टपम्॥ १९

pañcadaśaṃ vāmanakaṃ kṛtvāgādadhvaraṃ baleḥ|

padatrayaṃ yācamānaḥ pratyāditsustriviṣṭapam|| 19

अर्थ

पंद्रहवीं बार वामनका रूप धारण करके भगवान् दैत्यराज बलिके यज्ञमें गये। वे चाहते तो थे त्रिलोकीका राज्य, परन्तु माँगी उन्होंने केवल तीन पग पृथ्वी॥ १९॥✎ 30 31

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #30 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #31 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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