श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.23

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अहं पुरातीतभवेऽभवं मुने४

दास्यास्तु कस्याश्‍चन वेदवादिनाम्।

निरूपितो बालक एव योगिनां

शुश्रूषणे प्रावृषि निर्विविक्षताम्॥ २३

ahaṃ purātītabhave'bhavaṃ mune

dāsyāstu kasyāścana vedavādinām|

nirūpito bālaka eva yogināṃ

śuśrūṣaṇe prāvṛṣi nirvivikṣatām|| 23

अर्थ

मुने! पिछले कल्पमें अपने पूर्वजीवनमें मैं वेदवादी ब्राह्मणोंकी एक दासीका लड़का था। वे योगी वर्षाऋतुमें एक स्थानपर चातुर्मास्य कर रहे थे। बचपनमें ही मैं उनकी सेवामें नियुक्त कर दिया गया था॥ २३॥✎ 47

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—सुतो।

    (मुद्रित पृष्ठ 100)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #47 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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