श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.36

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यमादिभिर्योगपथैः कामलोभहतो मुहुः।

मुकुन्दसेवया यद्वत्तथाऽऽत्माद्धा न शाम्यति॥ ३६

yamādibhiryogapathaiḥ kāmalobhahato muhuḥ|

mukundasevayā yadvattathā''tmāddhā na śāmyati|| 36

अर्थ

काम और लोभकी चोटसे बार-बार घायल हुआ हृदय श्रीकृष्णसेवासे जैसी प्रत्यक्ष शान्तिका अनुभव करता है, यम-नियम आदि योगमार्गोंसे वैसी शान्ति नहीं मिल सकती॥ ३६॥✎ 58 59 60 61 1280 1281

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
  • #58 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #59 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #60 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #61 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1280 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: (प्रलय-कालीन → (प्रलयकालीन
  • #1281 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पांच-भौतिक → पांचभौतिक

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