mukundasevayā yadvattathā''tmāddhā na śāmyati|| 36
अर्थ
काम और लोभकी चोटसे बार-बार घायल हुआ हृदय श्रीकृष्णसेवासे जैसी प्रत्यक्ष शान्तिका अनुभव करता है, यम-नियम आदि योगमार्गोंसे वैसी शान्ति नहीं मिल सकती॥ ३६॥✎ 5859606112801281
यमादिभिर्योगपथैः कामलोभहतो मुहुः।
मुकुन्दसेवया यद्वत्तथाऽऽत्माद्धा न शाम्यति॥ ३६
काम और लोभकी चोटसे बार-बार घायल हुआ हृदय श्रीकृष्णसेवासे जैसी प्रत्यक्ष शान्तिका अनुभव करता है, यम-नियम आदि योगमार्गोंसे वैसी शान्ति नहीं मिल सकती॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 106) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)