श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.41

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अथोपेत्य स्वशिबिरं गोविन्दप्रियसारथिः।

न्यवेदयत्तं प्रियायै शोचन्त्या आत्मजान् हतान्॥ ४१

athopetya svaśibiraṃ govindapriyasārathiḥ|

nyavedayattaṃ priyāyai śocantyā ātmajān hatān|| 41

अर्थ

इसके बाद अपने मित्र और सारथि श्रीकृष्णके साथ वे अपने युद्ध-शिविरमें पहुँचे। वहाँ अपने मृत पुत्रोंके लिये शोक करती हुई द्रौपदीको उसे सौंप दिया ॥ ४१॥

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