श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

गिरं समाधौ गगने समीरितां

निशम्य वेधास्त्रिदशानुवाच ह।

गां पौरुषीं मे शृणुतामराः पुन-

र्विधीयतामाशु तथैव मा चिरम्॥ २१

giraṃ samādhau gagane samīritāṃ

niśamya vedhāstridaśānuvāca ha|

gāṃ pauruṣīṃ me śṛṇutāmarāḥ puna-

rvidhīyatāmāśu tathaiva mā ciram|| 21

अर्थ

उन्होंने समाधि-अवस्थामें आकाशवाणी सुनी। इसके बाद जगत‍्के निर्माणकर्ता ब्रह्माजीने देवताओंसे कहा—‘देवताओ! मैंने भगवान्‌की वाणी सुनी है। तुमलोग भी उसे मेरे द्वारा अभी सुन लो और फिर वैसा ही करो। उसके पालनमें विलम्ब नहीं होना चाहिये॥ २१॥

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