श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! उस समय जब ग्वालबाल खेल-कूदमें लग गये, तब उनकी गौएँ बेरोक-टोक चरती हुई बहुत दूर निकल गयीं और हरी-हरी घासके लोभसे एक गहन वनमें घुस गयीं॥ १॥✎ 1816
क्रीडासक्तेषु गोपेषु तद्गावो दूरचारिणीः।
स्वैरं चरन्त्यो विविशुस्तृणलोभेन गह्वरम्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! उस समय जब ग्वालबाल खेल-कूदमें लग गये, तब उनकी गौएँ बेरोक-टोक चरती हुई बहुत दूर निकल गयीं और हरी-हरी घासके लोभसे एक गहन वनमें घुस गयीं॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.19.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 256) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/19/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1816 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): हरी हरी → हरी-हरी