श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.19.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अथैकोनविंशोऽध्यायः

गौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना

श्रीशुक उवाच

क्रीडासक्तेषु गोपेषु तद्गावो दूरचारिणीः।

स्वैरं चरन्त्यो विविशुस्तृणलोभेन गह्वरम्॥ १

krīḍāsakteṣu gopeṣu tadgāvo dūracāriṇīḥ|

svairaṃ carantyo viviśustṛṇalobhena gahvaram|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! उस समय जब ग्वालबाल खेल-कूदमें लग गये, तब उनकी गौएँ बेरोक-टोक चरती हुई बहुत दूर निकल गयीं और हरी-हरी घासके लोभसे एक गहन वनमें घुस गयीं॥ १॥✎ 1816

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1816 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): हरी हरी → हरी-हरी

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