श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.19.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तेऽपश्यन्तः पशून् गोपाः कृष्णरामादयस्तदा।

जातानुतापा न विदुर्विचिन्वन्तो गवां गतिम्॥ ३

te'paśyantaḥ paśūn gopāḥ kṛṣṇarāmādayastadā|

jātānutāpā na vidurvicinvanto gavāṃ gatim|| 3

अर्थ

जब श्रीकृष्ण, बलराम आदि ग्वालबालोंने देखा कि हमारे पशुओंका तो कहीं पता-ठिकाना ही नहीं है, तब उन्हें अपने खेल-कूदपर बड़ा पछतावा हुआ और वे बहुत कुछ खोज-बीन करनेपर भी अपनी गौओंका पता न लगा सके॥ ३॥✎ 1816

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1816 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): हरी हरी → हरी-हरी

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