श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.29.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

भर्तुः शुश्रूषणं स्त्रीणां परो धर्मो ह्यमायया।

तद्बन्धूनां च कल्याण्यः प्रजानां चानुपोषणम्॥ २४

bhartuḥ śuśrūṣaṇaṃ strīṇāṃ paro dharmo hyamāyayā|

tadbandhūnāṃ ca kalyāṇyaḥ prajānāṃ cānupoṣaṇam|| 24

अर्थ

कल्याणी गोपियो! स्त्रियोंका परम धर्म यही है कि वे पति और उसके भाई-बन्धुओंकी निष्कपटभावसे सेवा करें और सन्तानका पालन-पोषण करें॥ २४॥✎ 1818

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1818 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): सेवा → और सतियोंकी सेवा

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